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धोकर के मन की कालिख सद्प्रीति खोज लो |काँटों में खिलो फूल-सम, औ दिव्य ओज लो

May 6, 2017 08:10 AM

धोकर के मन की कालिख सद्प्रीति खोज लो
कांटो में खिलो फूल-सम औ दिव्य ओज लो

जिसने भी रक्त चूस सताया है दीन को
धिक्कारो ऐसे जीवन ,उस नर प्रवीण को
भारी है काल सब पर गुरुवाणी रोज लो
कांटो में खिलो फूल-सम औ दिव्य ओज लो

निज राष्ट्र तब सबल है जब ना दीनता छले
गम,भूख ,द्वंद,,चीखों, औ घुटन के सिलसिले
दूर हों समाज से उपाय ऐसे खोज लो
कांटों में खिलो फूल-सम औ दिव्य ओज लो

मनुजता-सुबोध चासनी का पान कीजिए
नेह-रूपमय हृदय ना अब विराम लीजिए
सघन एकता के राग का अमल सरोज लो
कांटों में खिलो फूल-सम औ दिव्य ओज लो

बृजेश कुमार नायक
जागा हिंदुस्तान चाहिए एवं क्रौंच सुऋषि आलोक कृतियों के प्रणेता
06-05-2017
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” कृति का गीत
(परिष्कृत गीत)
चोज=सुभाषित

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Pt. Brajesh Kumar Nayak
Pt. Brajesh Kumar Nayak
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