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काँटों को अपनाकर देखें

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

गज़ल/गीतिका

February 21, 2017

आओ फूल खिलाकर देखें
काँटों को अपनाकर देखें

खुली आँख से रातों में अब
सपने नए सजाकर देखें

बड़े दिनों से दर्द सहा है
चलो आज मुस्काकर देखें

रिश्ते नाते दूर हुए सब
फिर परिवार बनाकर देखें

मंजिल की चाहत में गुम थे
जो खोया था पाकर देखें

धन दौलत में डूब गए सब
अहम को आज जलाकर देखें

आँखों में जो कैद हैं मेरे
मोती आज लूटाकर देखें

तेरे आने की आहट है
दुल्हन सा शरमाकर देखें

लोधी डॉ. आशा ‘अदिति’

Author
लोधी डॉ. आशा 'अदिति'
मध्यप्रदेश में सहायक संचालक...आई आई टी रुड़की से पी एच डी...अपने आसपास जो देखती हूँ, जो महसूस करती हूँ उसे कलम के द्वारा अभिव्यक्त करने की कोशिश करती हूँ...पूर्व में 'अदिति कैलाश' उपनाम से भी विचारों की अभिव्यक्ति....
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