क़िस्सा अजीब है न कहानी अजीब है

किस्सा अजीब है न कहानी अजीब है
राजा के साथ है जो वो रानी अजीब है
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घटती है उम्र उसकी न मरती है दोस्तो
रहती है चाँद पर वो जो नानी अजीब है
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दिन में महकती रहती है हैरत ज़दा हूँ मैं
सब ख़ुशबुओं में रात की रानी अजीब है
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इबरत हंसी मजाक़ नहीं फलसफ़ा है ये
जो लिख रहा हूँ मैं वो कहानी अजीब है
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झरने पहाड़ फूल हवा धूप छाँव क्या
कुदरत की एक एक निशानी अजीब है
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सालिब चन्दियानवी

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