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क़िस्मत

amit pandey

amit pandey

मुक्तक

December 7, 2016

कुछ बातें अनकही सी थी
पर उनका समझना आसान था
मेरे लिए …
लोगों ने ना ही सुना न समझा
उस निशब्द को,न ही उसमें छिपे
गूढ़ रहस्य को ..
मैं समझता हूँ इसलिए कहता हूँ
ख़ुद को मजबूर करना
ख़ुद से ही दूर करना
सब नियति थी सब नियत था
मेरी क़िस्मत थी या उसकी क़िस्मत
अब प्रश्न है एक – विशाल
क़िस्मत ख़ुद बनती है या बनायी जाती है …
गर बनायी जाती है तो कौन है निर्माता
मेरी क़िस्मत का
उससे है आग्रह ,अनुनय-विनय
सिर्फ़ एक बार हाँ एक बार
क़िस्मत सवारने का मौक़ा दे

अमित

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Author
amit pandey
Banaras Hindu university

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