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क़तआ

मिलते हैं जख़्म दिल को मुहब्बत में आजकल
होती नही गुजर है शराफ़त में आजकल
—–
जो भी मिले हैं दोस्त जमाने में अब तलक
करते हैं सब जफ़ा ही ये गुरबत में आजकल

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प्रीतम श्रावस्तवी
प्रीतम श्रावस्तवी
भिनगा
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मैं रामस्वरूप उपनाम प्रीतम श्रावस्तवी S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत...
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