Dec 10, 2019 · कविता
Reading time: 2 minutes

कह मुक़री

1
ये है तो, जीवन मे रँग हैं
कदम सधे चलते सँग सँग हैं
इसके बिन तो दिन भी रैना
ऐ सखि साजन, ना सखि नैना

2
इसके बिना नहीं कुछ भाये
हमसे हरदम नैन मिलाये
देख देख कर नहीं भरे मन
ऐ सखि साजन , ना सखि दर्पन

3
जीवन का आधार यही है
खुशियों का भी सार यही है
मुश्किल इसे छोड़ कर जाना
ऐ सखि साजन , ना सखि खाना

4
मनचाही शौपिंग करवाता
और मान भी हमें दिलाता
रखता बिल्कुल रानी जैसा
ऐ सखि साजन , ना सखि पैसा

5
रहता है ये बनकर साया
देता हमको अपनी छाया
निष्ठा से है साथ निभाता
ऐ सखि साजन, ना सखि छाता

6
लगे हमें प्राणों से प्यारा
प्रथम आखिरी प्यार हमारा
इसके बिन नामुमकिन रहना
ऐ सखि साजन, ना सखि गहना

7
इनसे ही तो घर बनता है
ये चूल्हा चौका चलता है
होती भी आपस में अनबन
ऐ सखि साजन, ना सखि बर्तन

8
आँखों में मेरी रहता है
मुझसे अठखेली करता है
कैसा भी हो पर है अपना
ऐ सखि साजन, ना सखि सपना

9
दिल की हर धड़कन में बसता
होठों पर भी मेरे सजता
मेरा सबसे सच्चा मीत
ऐ सखि साजन, ना सखि गीत

10
कभी कभी ये अगन बढ़ाता
कभी बरसकर हमें लुभाता
मूड बदलते रहते हरदम
ऐ सखि साजन, ना सखि मौसम

03-04-2016
डॉ अर्चना गुप्ता
11
बार बार ये आँचल खींचे
पीछे डोले आँखें मींचे
जीवन इससे ही आबाद
का सखि साजन, नहिं औलाद
12
साथ हमारे ही ये रहता
इधर मटकता उधर मटकता
हमें बिठाकर रखता सर पर
का सखि साजन, नहिं स्कूटर
13
रोज रोज सपनों में आये
देख इसे मन खुश हो जाये
ये है मेरा पहला प्यार
क्या सखि साजन, नहिं सखि कार

28-11-2020
डॉ अर्चना गुप्ता

1 Like · 2 Comments · 57 Views
Copy link to share
Dr Archana Gupta
996 Posts · 118.8k Views
Follow 72 Followers
डॉ अर्चना गुप्ता (Founder,Sahityapedia) "मेरी तो है लेखनी, मेरे दिल का साज इसकी मेरे बाद... View full profile
You may also like: