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कह मुकरियां

Sandhya Chaturvedi

Sandhya Chaturvedi

कविता

September 24, 2017

विधा-कह मुकरियां

“रात भयी आके सताये।
भोर भयी वो चला जाये।
है वो मुझे बहुत प्यारा,
है सखी साजन,ना सखी तारा।।

आगे पीछे हर पल घूमे
गालों को मेरे चूमे
लगता है नजर का काला
है सखी साजन,ना सखी बाला।।

देखे जब मोहे बुलाये
रात को छत पर आये
लगे जैसे कितना प्यारा
है सखी साजन,ना सखी तारा।।

देखो तो वो कितना चँचल
पकड़ खींचे मेरा आँचल
सताने में मोहे आये मजा
है सखी साजन,ना सखी हवा।।

✍संध्या चतुर्वेदी
मथुरा (उप)

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Author
Sandhya Chaturvedi
नाम -संध्या चतुर्वेदी शिक्षा -बी ए (साहित्यक हिंदी,सामान्य अंग्रेजी,मनोविज्ञान,सामाजिक विज्ञान ) निवासी -मथुरा यूपी शोक -कविता ,गजल,संस्मरण, मुक्तक,हाइकु विधा और लेख लिखना,नृत्य ,घूमना परिवार के साथ और नए लोगो से सीखने का अनुभव। व्यवसाय-ग्रहणी,पालिसी सहायक,कविता लेखन

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