कहो कैसे जिए इस ज़िन्दगी को

कहो कैसे जिए इस ज़िन्दगी को
ज़रूरत आपकी है आशिकी को

मिटाकर फ़ासले आराम दे दो
बहुत मुश्किल है सहना बेरुखी को

बहाकर आसमां आँसू मुसलसल
बुझाता है जमीं की तिश्नगी को

सजाकर अपने होठों पर कभी तो
अमर कर दो हमारी शायरी को

गुजारा आप बिन होता नहीं है
करे दिल तोड़ दे ‘माही’ घडी को

माही

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प्रकाशन साहित्यिक गतिविधियाँ एवं सम्मान – अनेकानेक पत्र-पत्रिकाओं में आपकी गज़ल, कवितायें आदि का प्रकाशन...
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