.
Skip to content

कही सचका फसाना…..

nishant madhav

nishant madhav

गज़ल/गीतिका

January 6, 2017

कही सचका फसाना चल रहा है,
कहीं झूठा जमाना चल रहा है,

मै शायर हूँ मेरा इक शायिरा से,
कहीं टाँका भिडा़ना चल रहा,

वो अफसर की जो जेबों मे पडा है,
वो मुफलिस का खजाना चल रहा है,

कहानी मे नए किरदार आए,
मेरा किस्सा पुराना चल रहा है.

दलीलें लाख झूठी हो रही हो,
मगर सच का फसाना चल रहा है.

फलक पर वो दिवानी चल रही है,
जमी पर यह दिवाना चल रहा है.

सनम तेरी दिखाई राह पर अब,
तेरा आशिक दिवाना चल रहा है.

तेरे पीछे सनम मैं चल रहा हूँ,
मेरे पीछे जमाना चल रहा है.

©निशान्त माधव

Author
nishant madhav
Recommended Posts
उनके सवालों पर मेरा जवाब चल रहा है दोस्तों। सवाल जवाब का यहाँ सैलाब चल रहा है दोस्तों।
उनके सवालों पर मेरा जवाब चल रहा है दोस्तों। सवाल जवाब का यहाँ सैलाब चल रहा है दोस्तों। * महफ़िल में जुट रहे बंदे पहचाने... Read more
चल-चले मिले कहीं
चल-चले मिले कहीं न तेरा आश्रय न मेरा, प्रीति-गीत गाए कहीं चल-चले मिले कहीं। सच-झूठ की फिकर नही जिस राहा पर मिला, मैं अजनबी नही,... Read more
चल रहा है
1222 1222 122 हसीनों का जमाना चल रहा है अभी उन पर मिटाना चल रहा है बड़ी सुंदर नई नादान बाला तभी उसको रिझाना चल... Read more
गजल
जिंदगी की राह में बनके बेगाना चल दिए लूट कर सुख चैन देखो कर दिवाना चल दिए आपकी ही बात है अब आपसे ही कर... Read more