कहीं से न पौन है|/ज्ञान-प्रेम भक्त बन|

(1)
कहीं से न पौन है
…………………..
ज्ञान की सु गोन है|
सहज और मौन है|
‘नायक’वह प्रेममय|
कहीं से न पौन है|

( 2)
ज्ञान-प्रेम-भक्त बन
…………………..
नहीं मोह-ग्रस्त बन |
चेत-सूर्य मस्त बन|
आत्मा को जानकर |
ज्ञान -प्रेम-भक्त बन|

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

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