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कहानी ..... दु:खी जनता

******** दु:खी जनता
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******एक ताजाकहानी …. दुखी जनता
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एक गांव के लोगों ने जो प्रधान चुना वो रडंवा था। उस गांव के सरपंच से लेकर अन्य पंच तक सभी कवारे और रडुंआ थे । गांव के ज्यादातर लोगों पर उनका भूत सवार था, कुछ दिन सबको बहुत अच्छा .. अच्छा लगा, मगर कुछ दिनों बाद पंचायत में जो भी फैसला होता उन्हीं की मर्जी से होता । यहां किसी के पक्ष ..विपक्ष की कोई सुनवाई नहीं थी वह चाहे तो स्याह को सफेद करें और चाहे सफेद को स्याह करें । गांव के लोग उनकी इन हरकतों से परेशान होने लगे । गांव में एक 4 .. 5 साल के बच्चे का अपहरण हो गया था जिसको लेकर बच्चे के परिवार वाले पंचायत के पास पहुंचे तो सरपंच ने कहा ….. अब तुम्हारे बच्चों को भी हमीं रखायेंगे ? जब बच्चे नहीं संभलते तो पैदा क्यों करते हो ?
क्या यही काम रह गया है हमें ? जाओ जाकर अपने आप ढूंढो, परिवार वाले उदास मन से ग्राम प्रधान के पास पहुंचे तो प्रधान जी बोले ……बच्चे पैदा ही क्यों करते हो ?
सरपंच जी ने जो फैसला किया वह बहुत सही किया है …. अब तुम्हारे बच्चे भी हमें ही ढूंढने पड़ेंगे ? कल को तुम्हारे घर का जानवर खो गया तो क्या उसे भी हम ही ढूंढेंगे ?
बच्चे की मां बोली ……साहब क्या बच्चे और जानवर में कोई फर्क नहीं है ?तो प्रधान जी दहाड़ते हुए बोले ….. बहुत जुवान चलाती हो ,तुम्हें पता है इसकी सजा क्या हो सकती है ? हमसे बहस करने के और हमारे सामने निगाह उठाने के जुर्म में आप को 6: साल तक की सजा हो सकती है!
बच्चे का परिवार मायूस हो घर आकर चुप बैठ गया! इस घटना का चर्चा तो बहुत रहा मगर किसी ने खुलकर विरोध नहीं किया और मामला दब गया । वह बच्चा इस घर का इकलौता चराग था।
कुछ दिनों बाद स्कूल से आती एक लड़की को कुछ दरिंदों ने घेर लिया और उसकी इज्जत तार ..तार कर दी गई! परिवार के लोग जब कुछ पड़ोसियों को लेकर सरपंच के पास गए तो सरपंच ने कहा …….लड़की को स्कूल भेजने की क्या जरूरत थी? जब लड़की को स्कूल भेजोगे तो ऐसी घटनाएं तो होंगी ही ना , अब हम एक एक आदमी के पीछे तो नहीं डोल सकते ना।
अब कुछ करने से इस लड़की की इज्जत वापस तो आ नहीं जाएगी ,जाओ और इसकी शादी करवा दो ।
उदास और लज्जित परिवार ग्राम प्रधान के पास पहुंचे तो ग्राम प्रधान ने कहा ..… इस उम्र में ऐसी भूल हो ही जाती है, तो क्या उन बच्चों को फांसी पर चढवा दे ?
” रखे ना माल आपनो
गाली चौरन को देय
बोये पेड़ बबूल के
आम कहां से देय”
क्या जरूरत थी लड़की पैदा करने की अब तो भुगतो । इतना कहकर प्रधान जी अपनी पंचायत में व्यस्त हो गए और यह मायूस परिवार घर आकर खामोश हो गया ।
एक दिन सुबह के समय पूरे गांव में जैसे कोहराम ही तो मच गया था। एक किसान को रात खेत में किसी ने बडी बेरहमी से मार दिया पूरे किसान और मजदूर मिलकर पंचायत के पास पहुंचे उन्होंने कहा कि …..रात खेत में पानी देने गया था और किसी ने बडी निर्दयता से मार दिया। यदि ऐसा होता रहा तो हम अपनी फसलों को नहीं बचा पाएंगे!
सरपंच ने कहा …… क्या जरूरत थी रात को पानी देने की ? दिन में सोते हो, मजा करते हो और बिना सिर पैर के झगड़े लेकर हमारा समय खराब करते हो । क्या और काम नहीं रहा हमारे पास ।
अब यह किसान मजदूर ग्राम प्रधान के पास पहुंचे प्रधान जी बोले …….रात सोने के लिए है या पानी लगाने के लिए है ?
क्या जरूरत थी रात में पानी लगाने की, आप खुद अपनी मुसीबत मोल लेते हो, क्या वहां रात में अनारकली नाचने वाली थी जो रात को बीवी को छोड़कर खेत पर पहुंच गए । एक आदमी हिम्मत करके बोला ….साहब यदि हम खेत नहीं रखायेगें तो फसल की पैदावार कैसे होगी ।
ग्राम प्रधान भडकते हुए बोला …..तो क्या हर किसान के पीछे एक चौकीदार खड़ा कर दूं ? बिन सर .. पैर के मुद्दे लेकर चले आते हैं मुंह उठाकर! आज यह किसान और मजदूर दोनों ही ग्राम प्रधान को अपना वोट देकर जैसे पछता ही तो रहे थे। अपने चेहरे की उदासी और बेवशी लेकर सभी अपने अपने घर लौट गए।
अब कुछ दिन बाद इसी गांव में एक गाय का बच्चा किसी तरह मर गया ,सुबह तक पूरे गांव में कोहराम मच गया, पंचायत बुलाई गई और कहा कि ……ढूंढिए वह कौन कातिल है जिसने यह घोर अपराध किया है ?
कौन है वह पापी जिस ने गाय मैया के इस बछड़े को मार दिया है? सरपंच के इस उतावले पन को देख मृत किसान का पुत्र बोला ………साहब आपको यह जानवर तो बड़ा दिखाई दे रहा है ,मगर मेरे पिताजी आपको दिखाई नहीं दिये ?
सरपंच और ग्राम प्रधान दोनों ही भड़क उठे और पहले सरपंच गुस्से से लाल पीले होते हुए बोला …..…इस पाखंडी को पेड़ से बांधा जाए इसके परिवार का हुक्का पानी बंद कर दिया जाए और इसका सिर का मुंडन कराकर हर एक आदमी जाते …जाते इसके सर पर जूता मारेगा ।
गाय मैया के बछड़े को जानवर कह कर उसे अपमानित कर रहा है ,परिवार के लोग ग्राम प्रधान के पास गए तो ग्राम प्रधान ने सुन कर कहा ….. अधर्मी ..पापी….. पाखंडी तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई हमारे पास इस बात को लेकर आने की?
गाय का बछड़ा जानवर नहीं गौ माता का बछड़ा है ,वह पूजनीय है ।कोई इंसान मरता है तो मरे ।मगर गाय मैया और उस की जाति पर हम कोई भी हस्तक्षेप और कटाक्ष बर्दाश्त नहीं करेंगे ।आज इस के पूरे परिवार को गांव से बाहर निकाल दिया जाए और इस तरह यह पाप बढ़ता चला गया … बढ़ता चला गया …..बढ़ता चला गया।
क्योंकि जब किसान मरे तो बाकी लोग चुप थे जब अपहरण हुआ तो एक समाज ही अकेला खडा था और जब बच्चे का अपहरण हुआ तो एक ही समाज लड़ रहा था। यदि सारे समाज के लोग एक साथ लड़ते तो शायद पंचायत सही फैसला करने पर मजबूर हो जाती और ग्राम प्रधान भी सही बात करता, यदि सभी मिलकर एक दूसरे की लड़ाई लडें तो व्यवस्था परिवर्तन बहुत जल्दी हो जाएगा ।
अब फिर चुनाव है इस गांव में मगर कुछ लालची और बेशर्म लोग फिर इस ग्राम प्रधान और सरपंच के पक्ष में खड़े हैं तब ऐसे में व्यवस्था परिवर्तन की सोचना भी कल्पना से परे हैं।
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मूल लेखक ……
डॉ नरेश कुमार “सागर”
कहानी सीधे मोबाइल की कीपैड पर लिखी गई है शब्दों की हेरा फेरी को नजरअंदाज करके कहानी का मर्म समझे और अपनी प्रतिक्रियाएं अवश्य दे आपका स्वागत है!!
10/05/19
9897907490

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Naresh Sagar
Naresh Sagar
hapur
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