गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

” ———————————— कहां खो गया ” !!

वो आंखों का तारा कहाँ खो गया !
जो कल था हमारा कहां खो गया !!

दुनिया की नज़र काली उसको लगी !
वो सहारा हमारा कहां खो गया !!

ले आगोश में सच हम खुश थे बहुत !
वो अब करके किनारा कहां खो गया !!

वो रातों के तारे कड़ी धूप में!
यों बन के सहारा कहां खो गया !!

थी यादें सुहानी लगे शूल सी !
वो भोर का तारा कहाँ खो गया !!

फूल मुरझाये हैं गुमसुम है समां !
जो हंसी था नज़ारा कहां खो गया !!

अश्क़ आंखों के अब हैं थमते नहीं !
था सबसे जो प्यारा कहां खो गया !!

फिर मिलेगें अचानक किसी मोड़ पर !
वो करके ईशारा कहां खो गया !!

बृज व्यास

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