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कहाँ

Jul 8, 2016 05:21 PM

बतलाते हैं अमीर बहुत से
लोग शहरों के यहां
मगर मैं कभी जान न पाया
आखिर ये अमीरी कहाँ है
————–
मोल-भाव करते हैं वही
भरे रहते हैं जेब खूब
मुझे नहीं करना ये सब
फ़िक्र है बस एक रोटी कहाँ है
—————
हम ज़माने से खफा इसलिए
नहीं कि वज़ूद नहीं हमारा
तुम भी कम नहीं खुदमें
आखिर फिर दिखते कहाँ हो
—————
दो बूँद पानी कभी अमृत
है किसी के ले यहां
अभी अभी तो बारिश थी
हे ! बादल अभी कहाँ हो
———————-
सुख-दुःख तो
पहलू हैं ज़िंदगी के
दुःख ही दुःख दिखते हैं सबको
सुख वाले दिनों तुम कहाँ हो
————–
बहुत भ्र्ष्ट हो गया राष्ट्र
सब कहते हैं यही
तुम तो सही हो
आखिर दिखते कहाँ हो
________________________ बृज

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Brijpal Singh
Brijpal Singh
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मैं Brijpal Singh (Brij), मूलत: पौडी गढवाल उत्तराखंड से वास्ता रखता हूँ !! मैं नहीं...
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