Jun 2, 2016 · कविता
Reading time: 1 minute

कहती गई

सच तेरी मुहब्बत में हमेशा,मैं यूँ ही बहती गई ,
मुहब्बत की दरिया में बह,आज यहाँ आ गई,
याद है मुझे वो लम्हे,जो कभी गुजारा था यहाँ,
पता ही न चला कि कब किनारे से दूर हो गई,

लालजी ठाकुर

28 Views
Copy link to share
Laljee Thakur
2 Posts · 102 Views
मैं एक सिविल इंजीनियर हूँ भारत सरकार में।हिंदी और अंग्रेजी में कविता,हाइकू,लघु कथा,कहानी,दोहा,मुक्तक आदि लिखता... View full profile
You may also like: