कहती गई

सच तेरी मुहब्बत में हमेशा,मैं यूँ ही बहती गई ,
मुहब्बत की दरिया में बह,आज यहाँ आ गई,
याद है मुझे वो लम्हे,जो कभी गुजारा था यहाँ,
पता ही न चला कि कब किनारे से दूर हो गई,

लालजी ठाकुर

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मैं एक सिविल इंजीनियर हूँ भारत सरकार में।हिंदी और अंग्रेजी में कविता,हाइकू,लघु कथा,कहानी,दोहा,मुक्तक आदि लिखता...
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