" कश्शू "

देख करिश्मा कुदरत ने क्या करिश्मा दिखाई ,
तेरे जैसे करिश्मा मेरे ज़िन्दगी में ले आई ।

जब तु मेरे साथ स्कूल में पढ़ने आई थी ,
एक दूजे को चिट्ठी लिख हमने अपने हृदय की बात बताई थी ।

कक्षा में मेरी पहली मित्र तु ही कहलाई थी ,
खुशी से तभी तु मेरे लिए ईंटावा से सेमिया लाई थी ।

आज भी वो इमली की खट्टी – मीठी गोलियां याद है मुझे ,
जो हमने साथ में कभी स्कूल से घर आते वक्त खाई थी ।

एक – एक रूपए जोड़कर हमने कभी ,
नमकीन की सारी बोरियों को खुलवा कर खाई थी ।

आज भी मेरे पास है वो ग्रीटिंग कार्ड ,
जो तु मेरे लिए नए साल पर लाई थी ।

हमारी जोड़ी ऐसी थी जो मेरे जिंदगी में एक नया मोड़ लाई थी ,
हम दोनों की मां सिर्फ निधि आंटी कहलाई थी ।

(29 जून – ये कविता मेरी प्रियसहेली को उसके जन्मदिन के अवसर पर उसे समर्पित है । वो मेरे जीवन में एक बहन से भी बढ़कर महत्व रखती है । उसके बारे में कहने के लिए मेरे पास शब्द ही नहीं है ।)

🙏 धन्यवाद 🙏

✍️ ज्योति ✍️
नई दिल्ली

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