कश्मीर की तस्वीर

एक दिन सपने में देखा अपना प्यारा कश्मीर,
“स्वर्ग से सुंदर ” धरा की उजड़ी हुई तस्वीर I

आदमी को आदमी का लहू पीते देखा ,
इंसान को भेड़-बकरियों की तरह बिकते देखा ,
बूढी आँखों में बेबसी के दर्दों को देखा ,
बिछड़े दिलों में “हिंदुस्तान से प्यार देखा” I

एक दिन सपने में देखा अपना प्यारा कश्मीर,
“स्वर्ग से सुंदर ”धरा की उजड़ी हुई तस्वीर I

शस्य-श्यामला धरती पर मचा कैसा कोहराम ?
लड़तें हैं अपनों से, उन्हें चाहिए बस अलग नाम ,
भूल गए “जहाँ के मालिक” का भी प्यारा पैगाम,
जिंदगी लेना-देना केवल उस मालिक का है काम I

एक दिन सपने में देखा अपना प्यारा कश्मीर,
“स्वर्ग से सुंदर ”धरा की उजड़ी हुई तस्वीर I

“भारत के मस्तक” पर मेरे दोस्त ने नज़र डाली ,
“भूल गया अंजाम-ए-हस्र ” फिर भी नज़र डाली,
“शीशे के महल” में रहने वालों ने नज़र डाली,
“लोकतंत्र’ का दम तोड़ने वालों ने नज़र डाली I

एक दिन सपने में देखा अपना प्यारा कश्मीर,
“स्वर्ग से सुंदर ”धरा की उजड़ी हुई तस्वीर I

“ राज ” सपने का मकसद गया जान,
अब न रह गया वह इससे अनजान ,
“कफ़न” बेचने वाले चला रहे अपनी दुकान,
सदैव रहेगा सिरमौर कश्मीर महान ,कश्मीर महान I

देशराज “राज”
कानपुर

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