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कश्मीर का दर्द

विजय कुमार अग्रवाल

विजय कुमार अग्रवाल

कविता

November 1, 2016

शिक्षा आज निशाना बन गई इस प्रदेश के गलियारों में ।
सुलग रहा हर रोज़ निकेतन क्या होगा उन परिवारों में ॥
जिनके बालक और बालिकाएं पढ़ने स्कूल सुबहा जाते है ।
कुशल वापसी होने पर ही साँस चैन की ले पाते है ॥
शिक्षा के ये वो मंदिर है जिन पर निर्भर अगली पीढ़ी ।
कुल 27 सुलग चुके है कल आयेगा नंबर किसका ॥
कब तक हम को सहना होगा कब तक डर कर रहना होगा ।
कब कश्मीर मेरे भारत का फ़िर से सुंदर
गहना होगा

विजय बिजनौरी

Author
विजय कुमार अग्रवाल
मै पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर शहर का निवासी हूँ ।अौर आजकल भारतीय खेल प्राधिकरण के पश्चिमी केन्द्र गांधीनगर में कार्यरत हूँ ।पढ़ना मेरा शौक है और अब लिखना एक प्रयास है ।
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