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कशमकश में जिंदगी

Rita Yadav

Rita Yadav

कविता

July 9, 2017

कशमकश में बढ़ रही है
जिंदगी आगे हर पल

कभी अनुभूति प्रेम की
कभी दिमागी हलचल

आज एक दिवस फिर गुजरा
कैसा रहेगा कल

परिश्रम और संघर्ष का
हमेशा मीठा होता है फल

साफ रखो गंगा यमुना
अन्यथा पाओगे न स्वच्छ जल

देश अब पुकार रहा है
कदम मिलाकर चल

जो बुरे वक्त में साथ दिया हो
उससे न कर कभी छल

जहां बुद्धिमता से काम हो जाए
वहां न दिखा बल

रंगत चाहे हो जैसा भी
स्वच्छ रखो ह्रदय तल

मुश्किल चाहे जितना हो प्रश्न
होता सभी का हल

नेता सारे एक जैसे
चाहे कोई भी हो दल

पानी का एक बूंद है किमती
खुला न रखो नल

स्वच्छता का ख्याल रखो
बाहर न करो मल

अच्छाई के पथ पर चलते जाओ
करो न कोई गल

रीता यादव

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Author
Rita Yadav
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