Apr 22, 2020 · कविता

कवि

मैं कवि नहीं कवि बनने में अभी तो बहुत कसर है
जो भी लिखता हूं ये आपकी दुआओं का असर है
.
मैं अपने माता पिता गुरू ईश्वर का वंदन करता हूं
और सच को सच लिखने में मैं कभी नहीं डरता हूं
.
हमारे सारे समाज का एक कवि आईना होता है
अन्तर्मन के भावों को पढ़के के शब्दों में पिरोता है
.
पर कुछ लिखने वालों के मन में कितना गरूर है
आजाद बताओ उनको कवियों के घर बहुत दूर है

1 Like · 1 Comment · 5 Views
You may also like: