कविता

माँ की महिमा
कलम लिख नहीं सकती
माँ की महिमा इतनी गहरी
माँ की सेवा जन्नत का द्वार
माँ के चरणों मे होता उद्धार
माँ की पूजा घर- घर होती
वही माँ शोषित पीड़ित होती
माँ अग्नि परीक्षा देती आई
सारा इतिहास दे रहा गवाही
माँ भूख प्यास सहती रहती
मजदूरी कर औलाद पढ़ाती
माँ सीता सावित्री मदालसा सी
आशीष से जिंदगी संवर जाती
कवि राजेश पुरोहित

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