.
Skip to content

कविता

प्रमिला तिवारी

प्रमिला तिवारी

कविता

January 10, 2017

“हमारी बेटियाँ”
अब परिचय की मोहता नही बेटियाँ
आज माँ पिता की सरताज हैं बेटियाँ ।

गंगा जैसी निर्मल,अग्नि सी निश्च्छल
शीतल समीर की झोंका हैं बेटियाँ ।

प्राण वायु हम सबकी जीवन की होती
होती घर परिवार की गले हार बेटियाँ ।

प्रेम निवेदन की साकार सच्ची रूप ये
वंशवेल की खूबसूरत फूल हैं बेटियाँ ।

ये सेतू जो दो दिलों को सदा है जोड़ती
आज क्या-क्या न सह रहीं, ये बेटियाँ ।

प्रकृति के आँगन मे,रंगों से भरे जीवन मे
क्यों हो रही रंगों से अनजान ये बेटियाँ ।

आँखों से जान जाती सब का दर्द सारा
जीते जी देख रही हैं नर्क का द्वार बेटियाँ ।

रोज घटते जा रहा आवादी भ्रूण हत्या से
हो रही आज बुराईयों की शिकार बेटियाँ ।

आइए नारा लगाऐं, हम भी आवाज उठाऐं
हर घर अलख जगाकर बचाऐंगे बेटियाँ ।

हे विश्व हो तैयार,करो तैयार अपनी बेटियाँ
बजा दें अपनी मूक सितार हमारी बेटियाँ ।

प्रमिला श्री तिवारी, स्वरचित किविता,
धनबाद, झारखण्ड

Author
Recommended Posts
कविता
"बेटियाँ" अब परिचय की मोहताज नही बेटियाँ आज माँ पिता की सरताज हैं बेटियाँ । गंगा जैसी निर्मल,अग्नि सी निश्च्छल शीतल समीर की झोंका हैं... Read more
बेटियाँ
माँ बाप का बड़ा अरमान होती हैं बेटियाँ हमारे घरों की अनोखी शान होती हैं बेटियाँ हमारे गोद में डालता जब परमात्मा है इन्हें हर... Read more
बेटियाँ
देश क्या परदेश में भी, छा रहीं हैं बेटियाँ हर ख़ुशी को आज घर में, ला रहीं हैं बेटियाँ बाग हमने जो लगाये, थे यहाँ... Read more
बेटियाँ
​बड़े-बड़े काम की हैं बेटियाँ, ईश्वर के नाम की हैं बेटियाँ, घर की लक्ष्मी, घर की इज्जत हैं बेटियाँ, घर को घर बनाने वाली जन्नत... Read more