कविता

धन

सब झगड़े होते आज धन के लिए
जिसके पास है ज्यादा वह धनी है
साम दाम दण्ड भेद से धन पाना
रिश्तों को रख ताक में धन लाना
धन के लिए टोने टोटके भी करना
धन के लिए देवताओं से माँगना
मन्नत दरगाह पर जाकर माँगना
धन के लिए दुश्मनी मोल लेना
धन के लिए पड़ोसी को भूलना
धन व्यक्ति के होश खो देता है
धनहीन व्यक्ति दीन हीन होता है
कोई धन पाकर विलास में डूबा
सुरा सुन्दरी में धन बर्बाद करता
कोई धन से धन जोड़ आगे बढ़ता
कोई धन से मान सम्मान भी पाता
कोई धन को परहित में लगा देता
धन की देवी लक्ष्मी को खूब पूजते
पर श्रम से कमाया धन ही रुकता
मजदूर धन के लिए मेहनत करता
कृषक दिन – रात पसीना बहाता
वैश्य धन के लिए व्यापार करता
धन को पाकर सबको ऋण देता
कवि राजेश पुरोहित

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