कविता

श्रीकृष्ण जन्म पर खास प्रस्तुति

रास रचैया कृष्ण
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कारागार में जन्म लियो हरि।
अष्टम पुत्र देवकी को जायो।।

पूतना को भी उद्धार कियो।
जहारीलो वालो दूध पिलायो।।

सगळी बहना कंस ने मारयो।
पाप घट जब मामा ने भरयो।।

आकाशवाणी गगन सूं होई।
कंस थारो अंत अबे आयो।।

देवकी पुत्र थारो काल आयो।
कंस वही तन्ने बैकुंठ पहुँचायो।।

कालिया नाग को भी नाथयो।
फण पे बैठ के कन्हैयो नाच्यो।।

बलदाऊ को भी मान बढ़ायो।
हलधर रूप में युद्ध जितायो।।

यशोदा माँ को ब्रहाण्ड दिखायो।
अर्जुन को विराट रूप लखायो।।

अट्ठारह अध्याय गीता पाठ चल्यो।
सारो भरम अर्जुन को मिटियो।।

ग्वाल बाल सब लीला देखे रे।
सूरदास सुण सुण यो हर्षायो।।

चोरी चोरी घर सूं माखन खायो।
सुदामा का दो मुट्ठी चावल खायो।।

जमुना तट पर खूब रास रचायो।
आत्मा सूं परमात्मा मिलवायो।।

कवि राजेश पुरोहित
भवानीमंडी

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