सावन ही जाने

कविता
——————
ननद के बहाने
सासू के ताने
विरहन की पीर
कोई क्या जाने ।
बाबुल का आंगन
मन भाए सावन
माता की प्रीत
मिलें वहीं जाने ।
बाग में झूले
मन मेरा डोले
मेघों का गर्जन
आ गये रुलाने ।
जियरा की जलन
घुंघट में घुटन
विरहन की आंच
जले वो जाने ।
दिल जागी लगन
कब आये साजन
मिलें दो अखियां
सावन ही जाने ।
———————-
रचनाकार – शेख जाफर खान

Like 3 Comment 10
Views 61

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share