23.7k Members 49.8k Posts

कविता हैं मन का भाव

कविता है मन का भाव,
भरती है जीवन के घाव,

जब हाेने लगती कांव कांव,
याद आता मुझकाे मेरा गांव,

वाे कहां गयी कागज की नाव,
कहां गये पाेथी पढ़ने वाले राव,

वाे ताऊ जी की मूंछाे का ताव,
बात बात पर स्वीकृति का हाव,

चलते चलते राह में थकते पांव,
नैना ढूंढे इधर उधर तरु की छांव,
~~~~~~~~~~~~~~~~~~
।।जेपीएल।।

Like Comment 0
Views 176

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share
जगदीश लववंशी
जगदीश लववंशी
368 Posts · 12.8k Views