.
Skip to content

कविता : स्वदेशी

Radhey shyam Pritam

Radhey shyam Pritam

कविता

December 17, 2016

स्वदेशी अपनाओ अगर विदेशी से अच्छा है।
संज्ञा नहीं कार्य ही स्वेच्छा की एक सुरक्षा है।
पहले तोलो फिर बोलो नीति कितनी सही है।
दूध से मिठाइयाँ,लस्सी और बनती दही हैं।
सही का दम भरो गलत को तुम खत्म करो।
आनंदमग्न रहो अपनी खुशी में न मातम करो।
जलवा ऐसा हो जिसे दुनिया में सलाम भरो।
नेकियाँ तुम करते चलो,कारवां बस बनता रहे।
सामने जो आए साथी तुम्हारा एक बनता रहे।
स्वदेशी का नारा तन-मन में समा जाए ऐसा।
शरीर में प्राणों का सिलसिला हो भाई जैसा।
कायनात में अपना एक नाम तो होना चाहिए।
देशप्रेम का बीज हर जन में देखो बौना चाहिए।
करतब ऐसे करो कि एक अफसाना बने बंधु।
जो देखे सुने वो तुम्हारा दीवाना एक बने बंधु।
सूर्य-चन्द्र की तरह,झूमें हम समंदर की तरह।
अपनेपन का अहसास हो बस नीलंबर की तरह।
पूरे हों अरमां सभी के यही एक दुवा करते हैं।
स्वदेशी अपनाओ आप पर एक निगाह करते हैं।
*****************************
*****************************
?? राधेयश्याम प्रीतम??

Author
Recommended Posts
कविता :-- संघर्ष
कविता :-- संघर्ष !! संघर्ष करो ! संघर्ष करो ! संघर्ष करो ! संघर्ष करो !! संघर्ष हो जीने का मक़सद , संघर्ष बिना क्या... Read more
अंगार वीर ने उगले है
अंगार वीर ने उगले है , कुछ ऐसा तुम श्रृंगार करो । रण में जो घाव मिले मुझको , चुम्बन से तुम उपचार करो ।... Read more
कविता: ?? मुस्क़राया करो??
मायूसी न तुम कभी,गले लगाया करो। ज़िन्दगी में हरपल,बस मुस्क़राया करो।। हर समस्या का हल,आज नहीं तो कल। कीमती मोती आँसू,व्यर्थ न बहाया करो।। तम... Read more
यूँ  न   करो
Sonu Jain कविता Oct 27, 2017
?‍♂ *यू न करो*? यू गम को तुम दिल से लगाया न करो... जिंदगी में हर पल तुम मुस्कुराया करो... तन्हाइयो की काली घटा भी... Read more