कविता :--क्यों जीता है तू मन मसोस ।।

कविता :– क्यों जीता है तू मन मसोस ???
कवि :– अनुज तिवारी “इंदवार”

लक्ष्य-भेद ! तू धर निशान ।
अरमानों के धनुष-बाण ।
कुछ तो निकलेगा ,
समाधान !
है कमियां सब की जन्मदोष ।
क्यों जीता है तू मन मसोस ???

रोता है किसको पुकार ।
है आँखों में ये अश्रु धार ।
क्यों ? मरता है तू ,
बार-बार !
खुद पर भी तो कर भरोस ।
क्यों जीता है तू मन मसोस ???

दुर्बलता है मन की सोच ।
अपने जख्मों को खरोच ।
पीड़ा के ये ,
अश्रु पोछ !
मन में भर इक नया जोश ।
क्यों जीता है तू मन मसोस ???

दिल में तेरे है उफान ।
दे उसको ऐसा दिशा-ज्ञान ।
पथ पर हों ,
पग के निशान !
जन-जन में होगा जय-घोष ।
क्यों जीता है तू मन मसोस ???

कोशिश कर के बल मिलता है ।
हर मुश्किल का हल मिलता है ।
चट्टानों में ,
जल मिलता है !
जिसके नेक इरादे ठोस ।
क्यों जीता है तू मन मसोस ???

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