कविता- 'मां' मेरी प्रेरणा

मैं एक छोटी सी नन्ही कलि हूं,
अपने जीवन में आगे चली हूं।
उस चांद को छूने की चाह को लेकर,
सितारों के नभ में उड़ी हूं।
मैं एक छोटी सी नन्ही कलि हूं,
अपने जीवन में आगे चली हूं।
मां ने सिखाया है चलाना और पढ़ना,
दिया है मुझे अपने आंचल का
झरना।
उसी से है सीखा खिलके यूं हंसना,
वही तो है मेरी वो ऊंची सी प्रेरणा।
मैं एक छोटी सी नन्ही कलि हूं,
अपने जीवन में आगे चली हूं।

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