कविता · Reading time: 1 minute

“कविता” बरसाती…..

“कविता”बरसाती***
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ये 2021 की नई बरसात है,
वर्षा ऋतु की ये सौगात है।
हो रही कविताओं की बारिश,
इसमें कई कवियों का हाथ है।

ये बरसात ऐसे हो रही है,
कि इसमें कई कवियों की;
भावनाएं भी बह रही है।
काव्य सब कुछ कह रही है।

इस बारिश में कई कवितायें,
निकल रही है, झमा-झम।
सब, कवि और कवयित्रियां,
लिख रहे काव्य, दना-दन।

मौसम ने हमे कवि-स्वप्न दिखाया,
काव्य -कला में रुचि पैदा कर;
काव्य- लेखन के गूढ़ सिखाया,
काव्य-भाव का प्रसून खिलाया।।

कुछ कवि-मन पर कर रहा आघात,
पावस की ये “कविता” बरसाती।
कुछ में काव्य लालसा जगा रही तो,
कुछ मन को सावन में यों तरसाती।

कुछ बरसाती कल्पना में डूबे हैं,
भूल गये, शहर और अपने सूबे हैं।
फिर भी, लिख रहे समय निकालकर:
कवि कहलाने के जो, उनके मंसूबे हैं।

इस मौसम ने, ऐसी वर्षा लायी,
रंग -बिरंगे शब्दरूपी ओले गिरायी।
कवियो ने काले- घने बादल में ,
स्वरचित, मौलिक कविता चमकाई।

इस पावस में मेढक से ज्यादा,
कवि- मन मोर मचल रहे है।
पुरस्कार और सम्मान पाने को,
अभी से ही कवि हाथ मल रहे है।

काव्य-रसों ने भींगा दिया सबको,
बरसात के मौसमी फुहार से।
इस मंच से जुड़ गए सब कविगण,
साहित्यपीडिया के एक पुकार से।

स्वरचित सह मौलिक

पंकज कर्ण
कटिहार
संपर्क-8936068909

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