(कविता) !प्यार !

हां मुझे प्यार है
तुम्हारी बातों से प्यार है
तुम्हारी ही दी हुई खामोशी है
उससे भी प्यार है
जिस दिन तुम आए
मेरी जिंदगीं में
उस दिन से प्यार है
तुम्हारी यादों को जो
सीनें में दबाए बैठी हूं
मुझे उससे भी प्यार है
तुम्हारे बोलते
चुप अधरों से भी प्यार है
तुम्हारे होठों के मुस्कान
से भी प्यार करती हूं
तुमने जब थामा था
मेरा मखमली हाथ,उस
अहसास से भी
मैं प्यार कर बैठी
क्या बताऊं मैं तुम्हे अब
तुम्हारे प्यार से भी प्यार है

स्व रचित डॉ. विभा रजंन(कनक)

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