' देख जवानों की कुर्बानी'

देख जवानों की कुर्बानी
आज तिरंगा भी रोया है ।
जाग उठा जनमत भारत का
बीज एकता का बोया है ।
रोष है छाया अब लो बदला
शोर मचा है अब करो हमला ।
भावुक हर दिल हो रहा है
खून के आँसू रो रहा है ।
देश की संसद तुम भी जागो
दल दल के विरोध को त्यागो ।
एकमत होकर आदेश करो
जनमत का सब रोष हरो ।
बार बार यूँ खूनी हमला
जनता सह न पाएगी ,
आखिर कब तक दानवता से मानवता ,
अहिंसा के चोले में मुँह छिपाएगी ?
कितनी बलि दे दीं निर्दोषों की
कितनी और अभी देनी हैं ?
संसद बतला दो अब सेना को
क्या भूमिका उसे निभानी है ।
आदेश करो बदला लेने का
हड़पी भूमि भी अब ले डालो ,
अखंड करो फिर से भारत को
वीरता अपनी सजा डालो ।
देश के जवानों की वीरता
उनका सुंदर गहना है ,
मातृभूमि की रक्षा हेतु ही
उसको उन्होंने पहना है ।
कायरों के हाथों सोते हमले में
व्यर्थ न उसको जाने दो ,
मातृभूमि की रक्षा का सपना
उनका पूरा होने दो ।

डॉ रीता सिंह
एफ 11 फेज़ 6
आया नगर,नई दिल्ली ।

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