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कविता : जैसी करनी वैसी भरनी

Radhey shyam Pritam

Radhey shyam Pritam

कविता

December 21, 2016

सूरज ने विदाई ली,रात सजकर आ गई।
चाँद मुस्कराने लगा,तारों को हँसी आ गई।।
१.आँखें सपने सजाने लगी,नींद जब आने लगी।
मीठे-मीठे सपनों से,रात गौरी बहलाने लगी।
दु:ख के बादल छट गए,सुख की सांसें आ गई।
चाँद मुस्कराने……………….।
२.सपने में हम स्वर्ग गए,देख अति प्रसन्न हुए।
सिंह,गाए एक घाट,पानी पीने में हैं मग्न हुए।
देखकर नजारा ये भैया!आँखें श्रद्धा से नम हुई।
चाँद मुस्कराने………………….।
३.सपने में हम नरक गए,देख अति दुखी हुए।
न था भाईचारा वहाँ,लोग आपस में झगड रहे।
देखा उनका जो रोना-धोना,दयादृष्टि बरस गई।
चाँद मुस्कराने…………………।
४.सपने में यम से मिले,मिलकर ये प्रश्न किया।
स्वर्ग-नरक में भगवान,इतना क्यों अंतर किया?
यम बोला सुन बेटा!अच्छे-बुरे कर्मों की गति यही।
चाँद मुस्कराने………………….।

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