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कविता :??....वीर जवानों....??

आन बान शान हो तुम देश की।
सुनहरी मुस्क़ान हो तुम देश की।
कर्म से तुम्हारे तिरंगा लहराए है,
वीरों एक ज़बान हो तुम देश की।

गर्मी-सर्दी सह सीमा सुरक्षा करते।
जान देकर भी देश की रक्षा करते।
कभी रिश्तों के तार तोड़कर तुम,
देश के आकाश में नव-रंग भरते।

संघर्ष करते बर्फ़ीले तुफ़ानो से भी।
लड़ते कभी तुम रेगिस्तानों से भी।
ख़ून की होली खेलते मौत झेलते,
आने-शम्मा-जलते परवानों-से भी।

विरह अपनों से प्रेम है सपनों से।
प्रेमटीस तन्हा बहती है नयनों से।
जीवन का हरलम्हा देशप्रेम-भीगा,
बीते जीते खुशी दिले-आइनों से।

वीर जवानों देश का सलाम लो।
देश की खुशी हृदय में थाम लो।
दिन में तारे दिखा दो दुश्मन को,
हौंसलों का भी तुम ये पैग़ाम लो।

मरेंगे या मिटेंगे जंगे-आज़ादी में।
बारुद भरे बैठे सीना फ़ौलादी में।
मिट्टी का कर्ज़ अदा कर जाएंगे,
कसर न छोड़ें शत्रु की बरबादी में।

………आर.एस.बी.”प्रीतम”

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आर.एस. प्रीतम
आर.एस. प्रीतम
जमालपुर(भिवानी)
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प्रवक्ता हिंदी शिक्षा-एम.ए.हिंदी(कुरुक्षेत्रा विश्वविद्यालय),बी.लिब.(इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय) यूजीसी नेट,हरियाणा STET पुस्तकें- काव्य-संग्रह--"आइना","अहसास और ज़िंदगी"एकल...