Jan 10, 2021 · कविता
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कविता : कोरोना को हराने चला ये तेरा पापा

कोरोना को हराने चला ये तेरा पापा
ज्ञान नया बताने चला ये तेरा पापा

छोड़ चला मेरी जां तो तुम रोना मत
सन्सार को बचाने चला ये तेरा पापा

मन को महसूस होगी तेरी कमी पर
कर्तव्य को निभाने चला ये तेरा पापा

मुँह पर मास्क बान्धे रहना घर मे तुम
यही बात को बताने चला ये तेरा पापा

सर माता का झुकने नहीं देना हमकों
लाज देश की बचाने चला ये तेरा पापा

लाशें ना बिछाए अदृश्य दुश्मन यहाँ पे
लोकडाउन करवाने चला ये तेरा पापा

दूरी बना रखना मुझसे बात करते हुए
दिल को ये समझाने चला ये तेरा पापा

हाथ पैर मुँह को धोते रहना घर मे तुम
वहाँ सनेटाइज कराने चला ये तेरा पापा

मत करना परेशान बाहर जाने को तुम
आज तुझे आजमाने चला ये तेरा पापा

पहले खुद अपने घर को सुरक्षित कर के
फिर दुश्मन को मिटाने चला ये तेरा पापा

जो शपथ खाई भारत माँ की आज मैने है
कर्ज दूध का चुकाने को चला ये तेरा पापा

कोरोना योद्धा की यही एक सोच
अपने घर से जाते हुए
जंय हिन्द जंय भारत घर मे रहे सुरक्षित रहे हमे अपना काम करने दें बाहर हम है आप की सुरक्षा के लिए सदैव

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kumar ashok3
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मैं अशोक कुमार सपड़ा हमदर्द स्नातक पास कविता लिखना व कार्टून बनाना अधूरा मुक्तक ,अधूरी... View full profile
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