कविता कोरोना एक वायरलैस बिमारी

कविता साहित्यपिडिया काव्य प्रतियोगिता 15 दिसंबर-15जनवरी 2021
कविता
।।वायरलेस बीमारी ।।
कोरोना कोरोना
कर के रोना मत।
मुंह पर कपड़ा
हटा के खोना मत।

हाथ साबुन से धोये
डरो- ना- डरो -ना।
छिक आए तो भी
गंदे हाथ रखो -ना।।

घर से तुम बाहर न निकलो ।
गम-करो-ना
कुछ खुशीया है घर तुम्हारी
तुम गंवाओ – ना।।

भारत वैदिक गुरू है
तुम खो-ओ-ना।
दुर रहकर बात करो
पास आओ ना ।।।

तुम नागरिक जिम्मेदार बन जाओ।
तुम भूलो- ना
कोरोना तो गंभीर है
पर तुम डरो- ना ।।
कवि प्रवीण पंड्या शहर डूंगरपुर ।

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