कविता के आयाम

छंदों से कर दूं आँख मिचोली,
या लिख दूं कोई सुरीली बोली …
शब्दों की लाली रच दूं,
या भर दूं पेचीदा अक्षरों की झोली ..

वर्णन करूं प्रकृति का रूप,
या भर दूं पन्ने लिख बिरह का दुःख …
बयान करूं कोई प्रेम गाथा,
या रुदन धरूँ लिख गरीबों की भूख …

लिखूं राजनीती की बातें,
या अंकित करूं माँ की ममता …
चर्चा करूं देश के इतिहास की,
या सिद्ध करूं युवा पीड़ी की क्षमता …

कलम आज तू खुद ही कवि बन जा,
अपनी स्याही से खुद ही कोई रचना रचा …
खुली आँखों से अँधेरा देख रहा हूँ मैं,
और आँखें बंद करूं तो जैसे कोई कोहराम मचा ..

सजन

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