कविता !! किताब !!

मैं स्याही
कोरे काग़ज पर
विस्तार चाहती हूं
अपने काले नीले रंग
से अपनी अमिट छाप छोड़ना

मैं काग़ज
मैं भी पुराने
अपने वक्षस्थल में
टंकन की धवनि से
अंकित होना चाहता हूं

मैं कलम
सबके हाथों
आकर अपने पुराने
अपने अंदर स्याही को
पुरासमो कर चलना चाहता हूं

मैं शब्द
अपने सब भाव
समेट कर एक बार
कलम स्याही के साथ
काग़ज पर स्थान चाहता हूं

मैं किताब
इन सबको ही
एक साथ लेकर
घर के किसी आलमारी में
नऐक्रम से दिखना चाहता ह़ू

स्वलिखित डॉ.विभा रजंन (कनक)

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 1 Comment 1
Views 40

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share