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कविता… अपनी भाषा हिंदी

Radhey shyam Pritam

Radhey shyam Pritam

कविता

September 12, 2017

मधुर मनोहर मीठी-सी,अपनी भाषा हिंदी है।
देवनागरी लिपि इसकी,माथे पर ज्यों बिंदी है।।
1..
हर शब्द है फूल इसका,भरलो रे हृदय गागरी।
मिलके बोलिए ज़ोश में,जय हिंदी-देवनागरी।
संस्कृत से उत्पन्न हुई,लेकर सुंदर सरल रूप।
नमन हृदय से करते हैं,कवि लेखक और ये भूप।
पहला स्थान जगमें मिला,वही राजभाषा हिंदी है।
देवनागरी लिपी………………..।
2..
हरभाषा से प्रेम करे,यही पलकों बिठाती है।
गीतों भजनों में बसके,मिस्री-सी घुल जाती है।
आन बान मान देश की,है ये पहचान देश की।
कोयल कूक सरीखी ये,सुनो है ज़ुबान देश की।
सब भाषाओं से मीठी,क्या कहना ये हिंदी है।
देवनागरी लिपी………………..।
3..
एकशूत्र में पिरो रखे,सबके मन को भाती है।
बड़े-बड़े ग्रन्थों से ये,जग तूती बुलवाती है।
एकदिवस नहीं अब बंधु,हरदिवस तुम मनाओ रे!
हिंदी हिंदू हिंदुस्तांं,नारा जग गुंजाओ रे!
देखो देश में ही नहीं,विदेश में भी ज़िंदी है।
देवनागरी लिपि………………..।
4..
चौदह सित्मबर का सन् ये,उन्नीस सौ उन्चास था।
राष्ट्रभाषा भारत हुई,हर भारती उल्लास था।
अंग्रेज़ी सखी बनाई,सुने धरती-आकाश था।
सब भाषाओं से आगे,सुनो दिन कितना ख़ास था।
सभी भाषाओं से लड़ी,करके चिंदी-चिंदी है।
राधेयश्याम बंगालिया
प्रीतम द्वारा
सृजित

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