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कविता।तुमको इक दिन आना है ।

रकमिश सुल्तानपुरी

रकमिश सुल्तानपुरी

कविता

June 24, 2016

गीत।तुमको इक दिन आना है ।।

विश्वासों की पृष्टिभूमि पर
प्रेम का महल बनाया हूँ
भावों की नक्कासी करके
दुनियां को झुठलाया हूँ
फिर भी ख़ाली
ख़ाली सा यह
नीरस ताना बाना है ।
तुमको इक दिन आना है ।1।।

आश्वाशन की राह चला मैं
मिली जीत न मुझको हार
अवसर पाकर करे बुराई
बेबस हृदय पर प्रहार
सह लूँगा हर
घाव हृदय पर
फिर भी मंजिल पाना है ।
तुमको इक दिन आना है ।।2।।

मन मन्दिर में बनी सीढ़ियां
सुखमय यादों तक जाती
बाट जोहती प्यासी आँखे
रह रह जब तब थक जाती
पलको से
ढरते है आँसू
कुछ दिन और बहाना है ।
तुमको इक दिन आना है ।।3।।

जिस दिन निकले चाँद गगन में
मेरी हँसी उड़ाता है
उगता सूरज आग बबूला
होकर मुझे जलाता है
पथ्थर तो मैं नही
परन्तु
पथ्थर ही बन जाना है ।
तुमको इक दिन पाना है ।। 4।।

अंधकार की नदी मोहिनी
उफनाती ले जल की धार
मैं तटबन्धों से प्रयासरत
तुम तो बसते हो उस पार
डरा नही
पर रुका रहूँगा
हठ की नाव चलाना है ।।
तुमको इक दिन आना है । 5।।

मेघ कपासी ठहर गये है
नयनो के भर आने से
मुस्काती है इंद्रधनुष भी
वर्षा के रुक जाने से
सन्नाटों के
कर्कश तानों
का भी दर्द उठाना है ।
तुमको इक दिन आना है ।। 6।।

ये मत सोचो रहे फ़ासला
तो हो जाऊंगा भयभीत
है अटूट अनवरत निरन्तर
तेरे मेरे मन की प्रीत
प्रतिबिम्बों के
एक सहारे
सचमुच दिल हर्षाना है ।।
तुमको इक दिन आना है ।।7।।

इस समाज के थोथे बन्धन
झूठी परम्पराओं से
बधा हुआ यह गात अचेतन
तुम हृदय तक भावों से
भाव शून्य हो
शिखर बिंदु को
पाकर गले लगाना है ।
तुमको इक दिन आना है ।।8।।

धुँधली है काया तेरी
पर तुमसे है हर कोना
मेरे सपनो की दुनियां में
सजता रूप सलोना
दो इक दिन की
दूरी है फिर
तो तुममे मिल जाना है ।।
तुमको इक दिन आना है।।9।।

हे ईश्वर नित आशाओं का
उर में हो निर्माण
ताकि जीवन के अनुभव का
मिले मुझे प्रमाण
कृपा नेह से
अवनत सर को
चरणों में सदा झुकना है ।।
तुमको इक दिन आना है ।।10।।

©राम केश मिश्र

Author
रकमिश सुल्तानपुरी
रकमिश सुल्तानपुरी मैं भदैयां ,सुल्तानपुर ,उत्तर प्रदेश से हूँ । मैं ग़ज़ल लेखन के साथ साथ कविता , गीत ,नवगीत देशभक्ति गीत, फिल्मी गीत ,भोजपुरी गीत , दोहे हाइकू, पिरामिड ,कुण्डलिया,आदि पद्य की लगभग समस्त विधाएँ लिखता रहा हूं ।... Read more
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