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कविताएँ

ashok dard

ashok dard

कविता

March 24, 2017

वक्त की हुंकार

यह कैसी वक्त की हुंकार मिलती है |
हो रही मानवता तार –तार मिलती है ||

मेरे बेटों –बहुओं से मुझे बचाओ तुम |
बेचारी करती बूढ़ी माँ पुकार मिलती है ||

आश्वासनों की घुट्टी जनता को पिला-पिला |
सत्ता शिलान्यासों से ही करती उधार मिलती है ||

दहेज-लोभियों के घर में आजकल |
बेचारी बेटी भोगती कारागार मिलती है ||

कभी सूखे कभी बाढ़ से कराहती हुई |
आज धरती उगलती अंगार मिलती है ||

सिसकती सरगोशियों का मंजर लिए हुए
पतझड़ के दामन में बहार मिलती है ||

रातों-रात अमीर बनने की हसरत लिए हुए |
युवा-शक्ति शार्टकट की शिकार मिलाती है ||

फन फैलाये आंतकवाद की जहरीली सर्पिणी|
देश-दुनिया डसने को तैयार मिलती है ||

मर गये स्वप्न सारे उम्र की दहलीज पर |
बोझ ढोती पीठ बूढ़ी लाचार मिलती है ||

‘दर्द’ की कलम लिखकर कड़वा सच आज का |
दुनियावालों को करती ख़बरदार मिलती है ||

मुस्कुराना चाहिए
मुश्किलें हों लाख फिर भी मुस्कुराना चाहिए |
आदमी को आदमी के काम आना चाहिए ||

बहकावे में आ भटक गये हैं जो अपनी राह से |
उंगली पकड़कर फिर उन्हें राह पे लाना चाहिए ||

सदियों से पसरा है यहाँ खौफ एक अंधेर का |
एक दीया उस दहलीज पर जलाना चाहिए ||

अपने ही थे वो लोग जो बैरी बने बैठे हैं |
पयाम दोस्ती का उस ओर जाना चाहिए ||

बाद में आती हैबात अपने अधिकार की |
फर्ज अपना यार मेरे पहले निभाना चाहिए ||

नायाब तोहफा है खुदा का यह जो मिली जिन्दगी |
इसका एक-एक पल काम आना चाहिए ||

धारा की दिशा में बहती हैं मरी मछलियाँ |
जिंदादिली को भंवर में आजमाना चाहिए ||

छीनता है जो रोटियां मुफलिसों के हाथ से |
कटघरे में बेनकाब कर दिखाना चाहिए ||

शूरवीरों-दानवीरों की गाथाओं से भरी |
दर्द किताबों में अपना नाम आना चाहिए ||

Author
ashok dard
अशोक दर्द लेखन-साहित्य की विभिन्न विधाओं में निरंतर लेखन व प्रकाशन सम्मान- विभिन्न सामजिक व साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित वर्तमान पता-प्रवास कुटीर बनीखेत तह. डलहौज़ी जि. चम्बा (हि.प्र) मोबाइल -9418248262 ईमेल-ashokdard23@gmail.com
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