.
Skip to content

कल जो बीती रात एक नया ख्वाब पल गया ….

Awneesh kumar

Awneesh kumar

कविता

March 20, 2017

कल जो बीती रात एक नया ख्वाब पल गया,
मन का एक हिस्सा किसी के नाम हो गया।
इजहार होठो से न हुआ लेकिन,
आँखों से आँखे मिली और अपना काम हो गया।(अवनीश कुमार)

Author
Awneesh kumar
नमस्कार अवनीश कुमार www.awneeshkumar.ga www.facebook.com/awneesh kumar
Recommended Posts
आँखो में चाँदनी है चेहरे पे सादगी है
मतला- आँखो में चाँदनी है चहरे पे सादगी है। तितली हवा नदी जैसी मेरी हमनशी है। माना कि बंद रखता है तू जुबान अपनी, पर... Read more
एक गुंचा.....
एक गुंचा (२१२ x ३ ) क्यूँ हवा में ज़हर हो गया हर शजर बेसमर हो गया !!१ !! एक लम्हा राह में था खड़ा... Read more
सुखदा------ कहानी
कहानी इस कहानी मे घटनायें सत्य हैं मगर पात्र आदि बदल दिये गये है। ओझा वाली घटना एक पढे लिखे और मेडिकल प्रोफेशन मे काम... Read more
सात मुक्तक
सात मुक्तक ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ 1- आज भी है गुलामी बड़ी देश मेँ हर घड़ी बेबसी ये खड़ी देश मेँ सत्य तो मौन है, है सहम सा... Read more