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कल्पना से परे

Raj Vig

Raj Vig

कविता

June 17, 2017

कल्पना से परे जो जहान है
मिले तुझे ये मेरा अरमान है
फूलों से भरी जो राहें हैं
मिले उन्हें जो तेरे पांव हैं ।।

चमकता जो रात मे चांद है
मिले उससे भी खूबसूरत तुझे जो शबाब है
कोयल की मीठी जो आवाज है
मिले जुबान तुझे कशिश जिसमे लाजवाब है ।

बरगद के वृक्ष मे जो छाया है
मिले तुझे सुखों से भरा जो साया है
तारों से भरा जो आकाश है
मिले आंगन तुझे बरसता जिसमे प्यार है ।

सागर मे जो खूबसूरत मोती हैं
मिले तुझे श्रंगार के जो आभूषण हैं
बहारों मे जो फूलों की खुशबु है
मिले महक उसे काया जो तेरी है ।।

राज विग

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Author
Raj Vig

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