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कलियां

sudha bhardwaj

sudha bhardwaj

कविता

January 24, 2017

बेंटियां(कलियां)

हर आँगन में खिली कली है।
कुछ मुरझायी कुछ अधखिली है।
हृदय में अभिलाषा के मोती।
प्रतिकली जीवन भर संजोती।
बिखरतें सपने टूटते दर्पण।
करती तन-मन-धन-अर्पण।
स्वभाव है इसका सवयं समर्पण।
वितरित करती खुशियां हर सू।
बिखराती मुस्कान यें हर भू।
जाने ना कोई पीड़ा इसकी।
बस मन में ही लेती सिस्की।
करे न यें प्रतिफल की इच्छा।
जीवन इसका एक समीक्षा।

सुधा भारद्वाज
विकासनगर उत्तराखण्ड

Author
sudha bhardwaj
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