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कलाम ए शूफियाना

umesh mehra

umesh mehra

गज़ल/गीतिका

April 8, 2017

हर शै में मेरे पीर का नूर नज़र आता है।
जर्रे जर्रे में बस मेरा हुजूर नज़र आता है।।
मेरी आशिकी तुम्हीं से वंदगी भी तुम्हीं से ।
आँखो में बस तेरा ही सुरूर नज़र आता है ।।
हर सांस है तुम्हीं से मेरी रूह में बसे हो।
नज़र नज़र में बस मेरा करतार नजर आता है ।।
हस्ती है क्या हमारी जो करम न हो तुम्हारा।
मेरी मुफलिसी में तू ही दातार नज़र आता है ।।
तूफान में घिरी है मेरी नाव जिंदगी की ।
आसरा है तुम्हारा तू ही पतवार नज़र आता है ।।

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umesh mehra

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