Feb 24, 2017 · कविता

कलम

कलम ही मेरी जान हैं,
कलम ही मेरा जहाॅ है,
कलम ही मेरी पुजा हैै,
कलम ही मेरा ध्‍यान है,
कलम ही मेरी अवनि है,
कलम ही मेरा आसमा है,
कलम ही मेरी आन है,
कलम ही मेरी शान,
कलम से ही मेरा परिचय,
कलम से ही मेरी पहचान,
कलम ही मेरी आत्‍मा,
कलम ही मेरी देह ,
कलम ही है परमात्‍मा,
कलम ही है आधार,
कलम ही मेरा अभिमान है,
कलम ही मेरा स्‍वाभिमान,
कलम ही मेरा मन्दिर हैं,
कलम ही मेरी मस्‍जिद है,
कलम ही मेरा शिवालय है,
कलम मेरी लिए हिमशिखर के समान,
कलम ही मेरी सदभावना
कलम ही मेरा सौह्रार्द है ा

भरत कुमार गेहलोत
जालोर (राजस्‍थान)
सम्‍पर्क सुत्र – 7742016184

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