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कलमकार है शमसीर नही रखते*

मानक लाल*मनु*

मानक लाल*मनु*

कविता

November 13, 2017

*कलमकार है शमसीर नही रखते*

बदल जाये हम ऐसी तासीर नही रखते,,
बटुये में हर किसी की तस्वीर नही रखते,,

जिसकी रखते है वो तुम ही खास हो,,
इतनी बुरी भी हम अपनी तकदीर नही रखते,,

कोई क्या मालो दौलत दिखायेगा हमे,,
जिसकी की कीमत हो वो जागीर नही रखते,,

चेहरे से नूर वो आँखो से कोहिनूर है,,
शहंशाह है दिल का कोई बजीर नही रखते,,

नादान होता दिल है मानते है सच मे,,
पर यकीन करते है मन अधीर नही रखते,,

मौके तो आयेंगे जमाने मे बशीर नही रखते,,
मनु कलम का शौक है शमसीर नही रखते,,

*?मानक लाल मनु?*

Author
मानक लाल*मनु*
सम्प्रति••सहायक अध्यापक2003,,, शिक्षा••MA,हिंदी,राजनीति,,, जन्मतिथि 15मार्च1983 पता••9993903313 साहित्य परिसद के सदस्य के रूप में रचना पाठ,,, स्थानीय समाचार पत्रों में रचना प्रकाशित,,, सभी विधाओं में रचनाकरण, मानक लाल मनु,
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