Sep 8, 2016 · कविता
Reading time: 1 minute

कर दी मैली…..

बदल गये गंगा तट वासी
पर न बदली गंगा माँ
सच में माँ तो माँ ही है
सदियो से वही निर्मल पवित्र
धारा***
पालनहार इस धरा पुत्रो की
सहनशीलता की मूर्ति है माँ
सहन करते करते पापो को
फिर भी तू न बदली माँ,
बदल गये हम स्वार्थ में
विकास की चाह में
चल पड़े विनाश में,
करनी थी तेरी रक्षा-सेवा
बदले में कर दी हम नासमझों ने
“गंगा” मैली तेरी धारा,
सच में माँ तो माँ ही है
सदियो से वही निर्मल पवित्र
धारा***
कब तक सहन करेगी माँ
इससे पहले तुझ को क्रोध आये
माँ इतनी कृपा करना
माँ इतनी दया करना
हम नासमझ समझ जाये
सुधर जाये।।
“जय गंगा माँ”???

^^^^^^^दिनेश शर्मा^^^^^^^

2 Comments · 97 Views
Copy link to share
Dinesh Sharma
44 Posts · 4.6k Views
Follow 2 Followers
सब रस लेखनी*** जब मन चाहा कुछ लिख देते है, रह जाती है कमियाँ नजरअंदाज... View full profile
You may also like: