कविता · Reading time: 2 minutes

कर्म से कदापि ना चूकें !

कर्म से कदापि ना चूकें !
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कर्म करते रहें….
कर्म करते रहें….
कदापि ना चूकें इससे
बस, कर्म करते रहें !!

इस अनिश्चितता भरे
जीवन समर में….
कर्म ही है ऐसा हथियार !
जिसके निरंतर प्रयोग से
खुद को हम….
जीवन समर के लिए
कर लेते हैं तैयार !!

इसीलिए हम सबसे
ये आवाह्न करते हैं ,
कि जीवन में सतत्
आगे बढ़ने के लिए
जब कोई तय रास्ता
मालूम ना पड़े !
तो अपने ज्ञान पुंज
से निकली ज्योति से
रास्ता अपना ढूंढ़ लें !
उसी तय रास्ते पर
पूरे जोशो-खरोश़ से
तत्क्षण ही निकल पड़ें !!

जब हमारी बचपना
बीत जाती है !
और हम जवानी की ओर
अपने कदम बढ़ाते हैं
तो हमें अच्छे-बुरे का
ज्ञान तो जरूर हो जाता है !
बस करते रहना है कर्म ,
समझ के जीवन का मर्म ,
बिना जीवन का मर्म समझे ,
गलत रास्ते पर कर्म करने
से कोई फायदा न होता है !
परिश्रम बेकार चला जाता है !!

अगर हम जीवन की
गहराई में ना जाएं !
एक आम इंसान की तरह
आम तरीके से ही ,
अपने कर्म से न चूकेंगे !
गर सतत् प्रयासरत् रहेंगे
तो सफल जरूर होंगे !!

बस इस बात का ही
ध्यान सदा रखना है ,
कि हम कामचोर ना बनें !
कुछ-न-कुछ काम करते
रहने की सच्चेष्टा
सतत् बरक़रार रहे !!

कोई अदना सा व्यक्ति
धीरे-धीरे भी प्रयत्न
करता रहता है तो
एक दिन सफल
जरूर हो जाता है !
और एक ऊंचे दर्जे
का ख़ास व्यक्ति भी
हाथ पर हाथ धरे
बैठा रहता है तो
वह जल्द ही ,
आसमान से धरती
तक पहुॅंच जाता है !
पल में ही उस
कर्महीन प्राणी का
वास्तविक स्वरूप
बिखरकर नष्ट हो जाता है !!

अत: हम तो आप सब को….
फिर से यही नेक सलाह देंगे !
कि बस भला-बुरा का ज्ञान रखें ,
खुद पर आत्मविश्वास बनाए रखें ,
धैर्य पूर्वक मेहनत सदैव करते रहें ,
आपसी प्रेम और विश्वास बनाए रखें ,
औरों के बहकावे में कभी ना आएं ,
अपनी अपनी बुद्धि सदैव जागृत रखें !
कर्म से विमुख न कोई कर सकता !
अत: अपने कर्म से कदापि ना चूकें !!

स्वरचित एवं मौलिक ।

अजित कुमार “कर्ण” ✍️✍️
किशनगंज ( बिहार )
दिनांक : 02-08-2021.
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