मुक्तक · Reading time: 1 minute

कर्म-पथ से ना डिगे वह आर्य है

सजग कर दे राष्ट्र को आचार्य है |
गुरु वही जो आत्मपथमय कार्य है |
रीढ ,वह ही लोक की बनता सदा|
कर्म-पथ से ना डिगे वह आर्य है |
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बृजेश की नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक “कृतियों के प्रणेता

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1) प्रकाशित कृतियाँ 1-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" काव्य संग्रह 2-"क्रौंच सु ऋषि आलोक" खण्ड काव्य/शोधपरक ग्रंथ 3- "पं बृजेश कुमार नायक की चुनिंदा रचनाएं" काव्य संग्रह उक्त तीनों कृतियाँ सम्पूर्ण विश्व…
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