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“करोना हैं, ना करो कुछ भी“

जल थल गगन पथ बन्ध हुए
बन्ध आना-जाना, मण्डी बाजार ।
काम काज पे प्रतिबन्ध हुआ,
नहीं लांघना घर का द्वार।
करोना प्रचण्ड है, ना करो कुछ भी
सख्त आदेश दे डाली सरकार।

श्वास रही ना स्वतन्त्र,
ना रहा कोई जन व्यवहार।
बन्ध बैठक, चौपाल और तास मंडली
रही ना कोई आपसी तकरार।
प्रिय दर्श को तरस गये,
मिलना हुआ दुश्वार।

सर, समी, जमीं हुए अछूत,
फैली छूत समस्त संसार।
आलय, निलय ताला बन्धी
बन्ध सीमांतर व कारोबार।
देश, धर्म पे आरोप प्रत्यारोप
दिखा राजनिति का तीक्ष्ण वार।

सावधानी, स्वच्छता मात्र उपाए
महामारी है, नहीं कोई उपचार।
दवा दारू कुछ ना काम आए,
वैद, हकीम, डाक्टर सब लाचार।
वक्त कठिन है, संभलना दोस्तो
स्वस्थ रहें आप और परिवार ।

शब्दार्थ
प्रचण्ड – उग्र
सर – जल, पानी
समी – समीर , हवा
आलय – स्थल ( उदाहरण:- कार्यालय, विद्यालय)
निलय – निवास
तीक्ष्ण – अति कष्ट दायक, जहरीला

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